चाइना डेली, सीजीटीएन और शिन्हुआ की रिपोर्टों से खुलासा; मिस्र, सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान का गठबंधन
इस्लामाबाद / बीजिंग:
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच 7 अगस्त को हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते, जिसे राजनीतिक विश्लेषक ‘इस्लामी नाटो’ (Islamic NATO) भी कह रहे हैं, के आधिकारिक गठन से काफी पहले चीनी मीडिया ने इसके पूरे ब्लूप्रिंट का खाका पेश कर दिया था। चीनी राज्य-समर्थित मीडिया में इस तरह के चार-स्तरीय (Quadrilateral) सुरक्षा ढांचे की चर्चा समझौते से करीब पांच महीने पहले से ही शुरू हो गई थी।
इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण विश्लेषण 24 जुलाई को चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली में ‘पैविंग ए न्यू पाथ फॉर मिडिल ईस्ट सिक्योरिटी’ (Paving a new path for Middle East security) शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। इसमें तीन देशों के अलावा मिस्र को भी शामिल करते हुए इसे भूमध्यसागर से दक्षिण एशिया तक फैले एक नए सुरक्षा गठबंधन का केंद्र बताया गया था।
चीनी मीडिया में सुरक्षा ढांचे के गठन का घटनाक्रम
चीन की सरकारी मीडिया एजेंसियों ने इस रणनीतिक बदलाव को चरणबद्ध तरीके से रिपोर्ट किया था:
| समय / माह | मीडिया संस्थान | प्रमुख रिपोर्टिंग व विश्लेषण |
| 29 मार्च | शिन्हुआ (Xinhua) | इस्लामाबाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों की बैठक को पहली बार ‘क्वाड्रिलेटरल’ (Quadrilateral) का नाम दिया। |
| 2 अप्रैल | सीजीटीएन (CGTN) | सवाल उठाया कि क्या यह चार-स्तरीय सहयोग आगे चलकर औपचारिक ‘रक्षा गठबंधन’ का रूप ले सकता है। |
| 21 जून | शिन्हुआ (Xinhua) | काहिरा बैठक के बाद मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी के इस तंत्र को ‘संस्थागत ढांचे’ में बदलने के सुझाव को प्रमुखता से छापा। |
| 24 जुलाई | चाइना डेली | 7 अगस्त के समझौते से दो हफ्ते पहले चारों देशों के भू-राजनीतिक व रक्षा तालमेल पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। |
चारों देशों की क्षमताओं का संयोजन
चाइना डेली के विश्लेषण के अनुसार, यदि यह चारों देश एक मंच पर आते हैं तो उनका संयुक्त प्रभाव ऊर्जा बाजारों, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और विशाल आबादी पर होगा:
- सऊदी अरब: प्रमुख आर्थिक शक्ति और वित्तीय बल।
- तुर्किये: उन्नत रक्षा उद्योग, आधुनिक तकनीक और विशाल सैन्य क्षमता।
- मिस्र: अरब जगत की प्रमुख सैन्य व कूटनीतिक शक्ति।
- पाकिस्तान: बड़ी थल सेना और सीमा सुरक्षा का लंबा अनुभव।
चीन के लिए क्यों अहम है यह गठबंधन?
विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग इस नए गठजोड़ को पश्चिमी देशों और अमेरिका के प्रभाव को काउंटर करने वाले एक प्रभावी जरिया के रूप में देखता है। ग्लोबल साउथ (Global South) में इस तरह के गुट के उभरने से चीन की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं (जैसे CPEC और BRI) को सुरक्षा मिलेगी और भूमध्यसागर से लेकर दक्षिण एशिया तक एक सुरक्षित सामरिक गलियारा तैयार हो सकेगा।

