केवल आपत्तिजनक लगना आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं, कोर्ट ने कहा- दो घंटे में पोस्ट हटाकर मांग ली थी माफी
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित एक पोस्ट को दोबारा साझा (री-शेयर) करने के मामले में पुणे की इंजीनियरिंग छात्रा खदीजा शहाबुद्दीन शेख के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्राथमिकी (एफआईआर) को पूरी तरह रद्द कर दिया है। उच्च न्यायालय ने अपने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि महज किसी पोस्ट को किसी वर्ग द्वारा आपत्तिजनक मान लेना ही उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए कानूनी रूप से पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
जस्टिस मिलिंद एन. जाधव की एकल पीठ ने 27 अक्टूबर को इस मामले में विस्तृत आदेश पारित करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति पर आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के लिए कथित आरोपों में संबंधित अपराधों के आवश्यक कानूनी तत्वों (इंग्रीडिएंट्स) की मौजूदगी अनिवार्य है। यदि पोस्ट से किसी अपराध का वास्तविक तत्व स्थापित नहीं होता, तो केवल असंतोष या आपत्ति के आधार पर पुलिसिया कार्रवाई को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने मामले के तथ्यों का विश्लेषण करते हुए विशेष रूप से रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता छात्रा उस विवादित सामग्री की मूल रचनाकार या लेखिका नहीं थी। उसने केवल एक अन्य सोशल मीडिया यूजर द्वारा लिखी गई पोस्ट को अपने निजी इंस्टाग्राम अकाउंट पर दोबारा साझा किया था। इसके अलावा उसने किसी दुर्भावना या शत्रुता को बढ़ावा देने के इरादे से यह पोस्ट नहीं डाली थी।
पीठ ने इस बात पर भी गौर किया कि छात्रा ने अपनी इस भूल का अहसास होते ही बेहद त्वरित और जिम्मेदार कदम उठाया था। उसने इंस्टाग्राम पर सामग्री साझा करने के महज दो घंटे के भीतर ही संबंधित पोस्ट को अपने हैंडल से हटा (डिलीट) दिया था। इतना ही नहीं, उसने सार्वजनिक मंच पर इस पोस्ट को लेकर स्पष्ट रूप से खेद व्यक्त करते हुए बिना शर्त माफी भी मांगी थी, जिससे यह सिद्ध होता है कि उसका इरादा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का कतई नहीं था।
उच्च न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में कहा कि इस प्रकार के मामलों में बिना किसी आपराधिक नीयत के दर्ज की गई एफआईआर को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अदालत ने राहत प्रदान करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि छात्रा के खिलाफ शुरू की गई दंडात्मक कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए, जिससे एक युवा छात्रा का शैक्षणिक भविष्य बेवजह प्रभावित न हो सके।

