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Wednesday, May 20, 2026

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ईंधन की कीमतों में फिर लगी आग: एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, दिल्ली में पेट्रोल ₹98 के पार

नई दिल्ली: देश में आम जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा इजाफा किया गया है। सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि महज एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं।

इससे ठीक तीन दिन पहले यानी पिछले शुक्रवार को ही केंद्र सरकार ने देशभर में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की थी।

महानगरों में पेट्रोल और डीजल के नए दाम

मंगलवार को हुई इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के चारों प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की नई दरें (प्रति लीटर) इस प्रकार हैं:

शहरपेट्रोल में बढ़ोतरीनया दाम (पेट्रोल)डीजल में बढ़ोतरीनया दाम (डीजल)
दिल्ली87 पैसे₹98.6491 पैसे₹91.58
मुंबई91 पैसे₹107.5994 पैसे₹94.08
कोलकाता96 पैसे₹109.7094 पैसे₹96.07
चेन्नई82 पैसे₹104.4986 पैसे₹96.11

वैश्विक ऊर्जा संकट: क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
घरेलू बाजार में ईंधन की इस लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां मुख्य वजह हैं:

पश्चिम एशिया में युद्ध: 28 फरवरी से अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

सप्लाई चेन में रुकावट: इस सैन्य टकराव के चलते समुद्री व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में तेल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

₹100 के पार कच्चा तेल: इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं और फिलहाल वैश्विक बाजार में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत के प्रयास जारी हैं।

दाम बढ़ने से तेल कंपनियों को कितनी राहत?
जब पिछले हफ्ते तेल की कीमतों में 3 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, तो उससे सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय घाटे में कुछ कमी आई है।

दैनिक घाटा हुआ कम: पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इस वृद्धि के बाद कंपनियों का दैनिक घाटा लगभग 25% घटकर 750 करोड़ रुपये रह गया है, जो पहले करीब 1,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया था।

सब्सिडी से इनकार: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए सरकार किसी भी प्रकार के राहत पैकेज या सब्सिडी पर विचार नहीं कर रही है।

गौरतलब है कि ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल में आए उछाल के बावजूद भारतीय सरकारी तेल कंपनियां 15 मई तक पुरानी कीमतों पर ही पेट्रोल-डीजल बेचकर उपभोक्ताओं को राहत दे रही थीं, लेकिन लगातार बढ़ते घाटे के कारण अब कीमतों को बढ़ाना अनिवार्य हो गया।

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