नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026
माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक अत्यंत संवेदनशील मामले में फैसला सुनाते हुए 28 सप्ताह से अधिक की गर्भवती एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को गर्भपात (Medical Termination of Pregnancy) कराने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला या नाबालिग को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भधारण जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
1. न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ: माँ की पसंद बनाम अजन्मे बच्चे का हित
पीठ ने 24 अप्रैल को पारित अपने आदेश में ‘प्रजनन स्वायत्तता’ (Reproductive Autonomy) पर कड़ा रुख अपनाया:
- निर्णय का अधिकार: कोर्ट ने कहा कि गर्भवती महिला की पसंद सबसे महत्वपूर्ण है, न कि जन्म लेने वाले बच्चे की। गर्भावस्था जारी रखने का फैसला केवल उस महिला का होना चाहिए जिसे उसे वहन करना है।
- अनुच्छेद 21: शरीर से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ और ‘निजता’ का अभिन्न हिस्सा है।
- अदालतों का दृष्टिकोण: संवैधानिक अदालतों को ऐसे मामलों में “निषेधात्मक” (Prohibitory) रवैया नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि गर्भवती महिला के दृष्टिकोण और उसके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
2. नाबालिग के संदर्भ में विशेष चिंताएं
अदालत ने नाबालिग की उम्र और उसकी भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कहा:
- मानसिक और सामाजिक असर: इस उम्र में अवांछित गर्भावस्था को जारी रखना नाबालिग के मानसिक स्वास्थ्य, उसकी शिक्षा और सामाजिक स्थिति पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकता है।
- अपरिवर्तनीय परिणाम: यदि कोर्ट इस स्तर पर राहत न देता, तो उस बच्ची को ऐसे शारीरिक और भावनात्मक आघात से गुजरना पड़ता जिसे कभी ठीक नहीं किया जा सकता था।
3. अवैध गर्भपात और असुरक्षित रास्तों का खतरा
सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत ही व्यावहारिक पहलू पर भी ध्यान आकर्षित किया:
- कानून से बाहर: कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि कानूनी रास्ते बंद कर दिए जाते हैं, तो लोग अवैध गर्भपात केंद्रों का सहारा लेते हैं। इससे गर्भवती महिला की जान को और भी अधिक खतरा पैदा हो जाता है।
- MTP एक्ट का उद्देश्य: मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट का मूल उद्देश्य ही महिलाओं को असुरक्षित गर्भपात के खतरों से बचाना है।
4. एम्स (AIIMS) को निर्देश
न्यायालय ने निर्देश दिया है कि नाबालिग का गर्भपात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में विशेषज्ञों की देखरेख में जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।

