नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2026
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली में नाला बनाने के एक सरकारी ठेके में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में औपचारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। यह मामला दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दिवंगत रिश्तेदार सुरेंद्र कुमार बंसल से जुड़ा है।
1. मामले की पृष्ठभूमि और जांच का हस्तांतरण
यह भ्रष्टाचार का मामला करीब एक दशक पुराना है, जिसकी जांच की कमान अब सीबीआई के हाथों में है:
- शुरुआती जांच: पहले इस मामले की जांच दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा की जा रही थी।
- सीबीआई को कमान: पिछले साल सितंबर में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले को औपचारिक रूप से सीबीआई को सौंप दिया था।
- आरोप: आरोप है कि सुरेंद्र कुमार बंसल ने 2015-16 के दौरान विभिन्न मुखौटा कंपनियों के नाम पर ठेके हासिल किए, भुगतान प्राप्त किया, लेकिन धरातल पर काम कभी पूरा नहीं किया गया।
2. जालसाजी और वित्तीय अनियमितताएं
सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में भ्रष्टाचार के तरीकों का विस्तार से उल्लेख किया गया है:
- नकली इनवॉइस: जांच में पाया गया कि बंसल ने ‘भारद्वाज एंटरप्राइजेज’ जैसी फर्मों के फर्जी इनवॉइस का उपयोग कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाया।
- मुखौटा कंपनियां: बंसल ने ‘कमल सिंह’ नामक व्यक्ति/कंपनी के नाम का उपयोग कर अवैध तरीके से लाभ कमाया। इस संबंध में एक दूसरी एफआईआर भी दर्ज की गई है।
- तकनीकी हेरफेर: सीबीआई का दावा है कि राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर तकनीकी अंकों में हेरफेर की गई, जिससे यह ठेका बंसल को बाजार भाव से 46% कम कीमत पर आवंटित किया गया।
3. पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल
एफआईआर और शिकायत में सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका की जांच की मांग की गई है:
- प्रभाव का इस्तेमाल: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए केजरीवाल ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने रिश्तेदारों (बंसल और अन्य) को अनुचित लाभ पहुँचाया।
- जांच का दायरा: सीबीआई अब इस कोण से भी जांच करेगी कि क्या ठेका आवंटन की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई सीधा हस्तक्षेप हुआ था।
4. राजनीतिक प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
- आम आदमी पार्टी का रुख: पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। ‘आप’ ने इसे 2024 से ही “बदले की भावना से की गई कार्रवाई” और “बेबुनियाद आरोप” करार दिया है।
- कानूनी पेच: चूंकि मुख्य आरोपी सुरेंद्र कुमार बंसल का 2017 में निधन हो चुका है, इसलिए सीबीआई अब उन अन्य सहयोगियों और लोक सेवकों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने इस कथित घोटाले में मदद की थी।

