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तेलंगाना: मोहम्मद अजहरुद्दीन और प्रोफेसर कोडंडाराम विधान परिषद (MLC) के लिए नामित; राज्यपाल ने दी मंजूरी

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हैदराबाद, 26 अप्रैल 2026

तेलंगाना की राजनीति में रविवार को एक बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम हुआ। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने ‘राज्यपाल कोटे’ से राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन और प्रोफेसर एम. कोडंडाराम को तेलंगाना विधान परिषद (MLC) के सदस्य के रूप में नामित किया है।

यह निर्णय न केवल सरकार के लिए राहत की बात है, बल्कि विशेष रूप से पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के राजनीतिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1. अजहरुद्दीन के लिए ‘डेडलाइन’ से पहले बड़ी राहत

मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 31 अक्टूबर, 2025 को तेलंगाना सरकार में मंत्री पद की शपथ ली थी। संवैधानिक नियमों के अनुसार:

  • किसी भी मंत्री को पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है।
  • अजहरुद्दीन के लिए यह समय-सीमा 30 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही थी।
  • इस नामांकन के बाद अब वे कैबिनेट में अपना पद सुरक्षित रख सकेंगे।

2. नामांकन का कानूनी आधार और शर्तें

राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि ये नामांकन पूरी तरह से न्यायपालिका के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे:

  • रिक्त स्थान: अजहरुद्दीन और कोडंडाराम को डी. राजेश्वर राव और फारूक हुसैन के स्थान पर नियुक्त किया गया है, जिनका कार्यकाल मई 2023 में ही समाप्त हो गया था।
  • अपील और सुनवाई: सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में इन नामांकनों को लेकर कानूनी चुनौतियां लंबित हैं। न्यायालय ने पहले भी स्पष्ट किया था कि राज्यपाल कोटे के तहत की गई कोई भी नियुक्ति चल रही कानूनी कार्यवाही के परिणाम पर निर्भर करेगी।

3. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सक्रियता

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस प्रक्रिया को गति देने के लिए 19 अप्रैल को राज्यपाल से विशेष मुलाकात की थी। राज्य मंत्रिमंडल ने अगस्त 2025 में ही इन नामों की सिफारिश भेजी थी। पिछले महीने मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया था कि चूंकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में कोई नई आपत्ति नहीं जताई है, इसलिए सरकार मंजूरी लेने के लिए स्वतंत्र है।

4. कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेताओं दासोजू श्रवण और कुर्रा सत्यनारायण द्वारा दायर याचिकाओं के कारण चर्चा में रहा है। याचिकाकर्ताओं ने पहले की नियुक्तियों को सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों का उल्लंघन बताया था। कोर्ट ने पूर्व में शपथ ग्रहण को ‘अनुचित’ बताते हुए इसे कानूनी कार्यवाही के अधीन रखने का निर्देश दिया था।

अगला कदम: अजहरुद्दीन और प्रोफेसर कोडंडाराम के आगामी शपथ ग्रहण समारोह की तारीख जल्द ही घोषित की जा सकती है। हालाँकि, इन नियुक्तियों पर सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले की तलवार अभी भी लटकी हुई है।

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