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Sunday, June 14, 2026

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ओडिशा में महिला सरपंच की गिरफ्तारी पर गरमाई राजनीति: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास का बड़ा हमला; पुलिस प्रताड़ना के आरोपों पर घेरा

भुवनेश्वर: ओडिशा में एक महिला सरपंच की पुलिस द्वारा की गई अचानक गिरफ्तारी और उसके बाद हिरासत के दौरान सामने आए कथित मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना (Custodial Harassment) के गंभीर आरोपों ने राज्य के भीतर एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई तीखे सवाल खड़े किए हैं।

दलित और आदिवासी जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाने का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्य का पुलिस प्रशासन सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “एक चुनी हुई महिला सरपंच, जो जनता का प्रतिनिधित्व करती है, उसे अपराधियों की तरह आधी रात को गिरफ्तार करना और हिरासत में प्रताड़ित करना बेहद निंदनीय है। यह घटना दर्शाती है कि ओडिशा में जमीनी स्तर पर काम करने वाले विशेषकर महिला, दलित और आदिवासी जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और उनकी आवाज को दबाने का प्रयास हो जा रहा है।”

भक्त चरण दास ने मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रताड़ना के आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी इस प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ पूरे राज्य में सड़क से लेकर विधानसभा तक एक बड़ा जनांदोलन शुरू करेगी।

क्या है पूरा विवाद और क्यों खड़े हो रहे हैं सवाल?स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित महिला सरपंच पर किसी विकास कार्य में अनियमितता या स्थानीय विवाद को लेकर एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
विवाद तब और गहरा गया जब सरपंच के परिजनों और नागरिक समाज (Civil Society) ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान बुनियादी कानूनी मानवाधिकारों और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस (जैसे सूर्यास्त के बाद महिला की गिरफ्तारी पर रोक) का खुला उल्लंघन किया गया। साथ ही, लॉकअप के भीतर उन्हें मानसिक रूप से टार्चर करने की बातें भी सामने आई हैं, जिसने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है।

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