नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026
भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (पाकिस्तान और बांग्लादेश) की सुरक्षा में तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के इंजीनियरिंग कैडर में डेढ़ दशक बाद हुई समीक्षा ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा मंजूर की गई ‘कैडर रिव्यू’ रिपोर्ट में सिविल विंग के पदों में बढ़ोतरी की गई है, जबकि इलेक्ट्रिकल विंग के पदों में भारी कटौती की गई है।
1. कैडर रिव्यू का मुख्य अंतर
समीक्षा के बाद इंजीनियरिंग कैडर की स्थिति इस प्रकार है:
| विंग | पुराना संख्या बल | नया संख्या बल | बदलाव |
|---|---|---|---|
| सिविल विंग | 761 | 849 | +88 (वृद्धि) |
| इलेक्ट्रिकल विंग | 962 | 854 | -108 (कटौती) |
2. पदों में फेरबदल का विवरण
सिविल विंग (लाभ में):
- नए पद: डीआईजी (वर्क्स) का नया पद सृजित किया गया।
- बढ़ोतरी: ‘सेकंड इन कमांड’ के पदों को 5 से बढ़ाकर 17 और सिपाही के पदों को 44 से बढ़ाकर 188 किया गया।
- कटौती: केवल हवलदार के 79 पद कम किए गए हैं।
इलेक्ट्रिकल विंग (नुकसान में):
- बड़ी कटौती: हवलदार के 336 पदों को घटाकर मात्र 205 कर दिया गया (131 पदों की कमी)।
- निरंतरता: सहायक कमांडेंट और इंस्पेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई।
- असंतोष: एसआई (SI) के 27 पद भी खत्म कर दिए गए हैं।
3. राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव की चिंता
इलेक्ट्रिकल विंग के कार्मिकों का कहना है कि पदों में इस कटौती का सीधा असर सीमा की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा:
- बॉर्डर फ्लड लाइटिंग: चौबीस घंटे निर्बाध रोशनी सुनिश्चित करने में समस्या।
- सर्विलांस: आधुनिक निगरानी उपकरणों और सेंसरों के लिए बिजली आपूर्ति प्रबंधन प्रभावित होगा।
- तकनीकी चुनौती: भूमिगत केबल नेटवर्क, डीजल जनरेटर और सोलर स्कीम के प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ जनशक्ति की कमी होगी।
4. ‘पक्षपात’ और ‘न्याय’ के सवाल
विंग के अधिकारियों और कार्मिकों ने इस समीक्षा को भेदभावपूर्ण और एकतरफा बताया है:
- अनदेखी: आरोप है कि समीक्षा समिति में इलेक्ट्रिकल विंग का कोई प्रतिनिधि नहीं था, जिससे ‘ऑडी अल्टरम पार्टेम’ (दूसरे पक्ष को सुनना) के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ।
- पदोन्नति का संकट: पदों के कम होने से इंस्पेक्टर और सहायक कमांडेंट स्तर के अधिकारियों की पदोन्नति के रास्ते बंद हो गए हैं। कई अधिकारी 10-12 साल से एक ही पद पर अटके हुए हैं।
- कोर्ट जाने की तैयारी: कार्मिकों ने बीएसएफ के महानिदेशक (DG) को प्रतिवेदन सौंपे हैं और जल्द ही इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

