डीजी-एसडीजी के 100% और एडीजी के 67% पदों पर आईपीएस होंगे तैनात; कैडर अफसरों ने लगाया अनदेखी का आरोप
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026’ की औपचारिक अधिसूचना जारी कर इसे सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) में प्रभावी रूप से लागू कर दिया है। इस नए अधिनियम के अमल में आने के बाद अर्धसैनिक बलों के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। हालांकि, कैडर अधिकारियों के पदोन्नति अवसरों को लेकर यह कानून शुरू से ही विवादों में घिर गया है और इसे देश की शीर्ष अदालत में चुनौती दी जा चुकी है, जहां मामले की सुनवाई जारी है।
नए कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में महानिदेशक (डीजी) और विशेष महानिदेशक (एसडीजी) के 100 प्रतिशत पदों पर केवल आईपीएस अधिकारियों की ही नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा, अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) स्तर के 67 प्रतिशत पद और महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के 50 प्रतिशत पद भी अनिवार्य रूप से आईपीएस संवर्ग से भरे जाएंगे। यह अधिनियम विधिवत संसदीय प्रक्रिया से गुजरा है, जिसे इसी वर्ष एक अप्रैल को राज्यसभा और दो अप्रैल को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था, जिसके बाद नौ अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हुई थी।
दूसरी ओर, अर्धसैनिक बलों के कैडर अधिकारियों के बीच इस अधिनियम को लेकर गहरा असंतोष देखा जा रहा है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पूर्व एडीजी एसके सूद के अनुसार, इस कानून को लागू करना केंद्रीय बलों के समर्पित कैडर अफसरों के अधिकारों पर कुठाराघात के समान है। उन्होंने रेखांकित किया कि सर्वोच्च अदालत भी पूर्व में यह स्वीकार कर चुकी है कि अर्धसैनिक बलों में कैडर अधिकारियों के लिए समयबद्ध पदोन्नति के अवसरों का भारी अभाव है।
सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी जैसे प्रतिष्ठित बलों में स्थिति यह हो गई है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कठिन परीक्षा पास कर बतौर असिस्टेंट कमांडेंट सेवा में आने वाले जमीनी कमांडरों को 15 वर्षों की निरंतर सेवा के बाद भी पहली नियमित पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। सेवा विशेषज्ञों का दावा है कि शीर्ष पदों पर आईपीएस का भारी कोटा तय हो जाने से अधिकांश कैडर अधिकारी कमांडेंट के पद से ही सेवानिवृत्त होने को मजबूर होंगे और 200 से 300 अफसरों में से शायद ही कोई विरला अधिकारी एडीजी पद तक पहुंच सकेगा।

