165 देशों में अनुमति के बावजूद भारत में मंजूरी न मिलने पर उठाए सवाल; एक्स पर छिड़ी तीखी राजनीतिक बहस
नई दिल्ली: सैटेलाइट इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी ‘स्टारलिंक’ की भारत में व्यावसायिक शुरुआत को लेकर छिड़ा विवाद अब खुलकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में आ गया है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और टेस्ला व स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक को नियामकीय मंजूरी और लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सीधे रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर निशाना साधा। मस्क के इस बयान के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी इस बहस में कूद पड़े और उन्होंने मस्क के बहाने केंद्र सरकार और कॉरपोरेट गठजोड़ पर तीखा तंज कसा।
विवाद की शुरुआत एलन मस्क की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर की गई एक पोस्ट से हुई। मस्क ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि स्टारलिंक आज दुनिया के 165 से अधिक देशों में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे रही है और वहां उसे सभी आवश्यक लाइसेंस प्राप्त हैं। उन्होंने दावा किया कि स्टारलिंक भारत सरकार के प्रत्येक नियम, कानून और सुरक्षा जरूरतों का पिछले पांच वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ पालन कर रही है। इसके बावजूद कंपनी को भारत में कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम और लाइसेंस क्यों नहीं दिया जा रहा है? मस्क ने सीधा सवाल दागते हुए लिखा, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”
मस्क की इस तीखी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, “भारत में स्वागत है एलन। अभी एक और दूसरे व्यक्ति के बारे में जानना बाकी है।” राहुल गांधी के इस तंज पर मस्क ने तुरंत पलटवार करते हुए लिखा, “धन्यवाद राहुल, यह वाकई चिंताजनक है।” दोनों के बीच हुए इस डिजिटल संवाद ने देश में बड़े उद्योगपतियों के कथित प्रभाव और टेलीकॉम क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है।
गौरतलब है कि भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम के आवंटन के तरीके को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। जहां स्टारलिंक और वैश्विक कंपनियां वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशासनिक आवंटन की मांग करती रही हैं, वहीं घरेलू टेलीकॉम कंपनियां नीलामी के जरिए समान अवसर दिए जाने की वकालत करती आई हैं। मस्क के ताजा बयानों के बाद भारत में स्टारलिंक के प्रवेश और टेलीकॉम सेक्टर की नियामक प्रक्रियाओं पर बहस और तेज हो गई है।

