29 C
Mumbai
Thursday, April 30, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

दिल्ली शराब नीति मामला: हाई कोर्ट में सुनवाई 4 मई तक टली; केजरीवाल और सिसोदिया ने किया कार्यवाही का ‘बहिष्कार’

Array

नई दिल्ली, 29 अप्रैल 2026

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को शराब नीति मामले में सीबीआई (CBI) की याचिका पर सुनवाई 4 मई के लिए टाल दी है। यह याचिका निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया गया था।

1. कोर्ट की कार्यवाही और ‘सत्याग्रह’ का रास्ता

सुनवाई के दौरान ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) के नेताओं का एक अलग ही रुख देखने को मिला:

  • सुनवाई का बहिष्कार: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सुनवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया।
  • चिट्ठी और तर्क: आप नेताओं ने न्यायाधीश को पत्र लिखकर सूचित किया कि वे महात्मा गांधी के ‘सत्याग्रह’ मार्ग का पालन करते हुए इस सुनवाई का बहिष्कार कर रहे हैं। पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने भी ऐसा ही पत्र अदालत को सौंपा।
  • अंतिम अवसर: न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए शनिवार तक का अंतिम अवसर दिया है।

2. ‘रिक्यूजल’ (हटने की मांग) पर विवाद

आप नेताओं ने पहले ही न्यायमूर्ति शर्मा से इस मामले की सुनवाई से हटने की मांग की थी, जिसे अदालत ने 20 अप्रैल को खारिज कर दिया था:

  • हितों के टकराव का आरोप: याचिकाकर्ताओं का दावा था कि न्यायाधीश के बच्चे केंद्र सरकार के वकील हैं, जिससे ‘पूर्वाग्रह’ की आशंका पैदा होती है।
  • अदालत का रुख: न्यायमूर्ति शर्मा ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि न्यायाधीशों को निराधार आशंकाओं के आधार पर खुद को मामलों से अलग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी मांगें मानी गईं, तो न्याय प्रणाली प्रभावित होगी।

3. निचली अदालत का वह फैसला जिसे दी गई चुनौती

  • 27 फरवरी 2026: विशेष निचली अदालत ने केजरीवाल और अन्य को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि सीबीआई का मामला न्यायिक जांच में टिकने लायक नहीं है।
  • 9 मार्च 2026: हाई कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।

4. सुनवाई टलने का तकनीकी कारण

बुधवार को सुनवाई स्थगित होने का मुख्य कारण यह रहा कि उच्च न्यायालय को अभी तक निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड (Trial Court Records) प्राप्त नहीं हुआ है। साथ ही, कुछ आरोपियों ने अभी तक अपने औपचारिक जवाब दाखिल नहीं किए हैं।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here