मुंबई/नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे घमासान के बीच अब महाराष्ट्र की राजनीति से भी एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के प्रमुख घटक दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर एक बार फिर विभाजन का बड़ा संकट मंडरा रहा है। राजनीतिक गलियारों और उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के नौ (9) लोकसभा सांसदों में से 6 से 7 सांसद सत्तारूढ़ शिवसेना (शिंदे गुट) के संपर्क में हैं और इस समय देश की राजधानी नई दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।
इस सियासी हलचल को तब और बल मिला जब यह खबर आई कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे मंगलवार (16 जून 2026) की देर रात अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए। हालांकि, उद्धव गुट ने अपने सांसदों में किसी भी तरह की टूट की संभावना को सिरे से खारिज किया है।
सांसदों को ₹15 करोड़ का एडवांस दिए जाने का सनसनीखेज दावा
इस संभावित टूट की अटकलों के बीच शिवसेना (UBT) के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मंगलवार की देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक बेहद विस्फोटक पोस्ट किया। संजय राउत ने दावा किया कि उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने और खरीदने के लिए करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन का खेल चल रहा है।
संजय राउत का ‘एक्स’ (Twitter) पर किया गया पोस्ट:
“अपना सपना मनी… मनी। ऐसी पुख्ता सूचना है कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए आज रात ₹15 करोड़ ($15\text{ Crore}$) का एडवांस दिया जाएगा। यह बेहद चौंकाने वाला, घृणित और लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला है।”
आदित्य ठाकरे का कद बढ़ने से नाराज हैं कई वरिष्ठ सांसद?
एकनाथ शिंदे खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दिल्ली में दावा किया है कि उद्धव गुट के 6 से 7 लोकसभा सांसद पाला बदलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शिंदे गुट के नेताओं के अनुसार, इस सामूहिक नाराजगी की मुख्य वजह पार्टी के भीतर आदित्य ठाकरे की भूमिका और उनका कद लगातार बढ़ाया जाना है।
सूत्रों के मुताबिक, बगावत की राह पर चल रहे वरिष्ठ सांसदों को यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है कि पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर आदित्य ठाकरे को संगठन में नंबर दो की हैसियत दी जाए।
उल्लेखनीय है कि शिवसेना (UBT) आगामी 19 जून को अविभाजित शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर आदित्य ठाकरे को लेकर एक बड़ी संगठनात्मक घोषणा करने की तैयारी में थी। याद दिला दें कि इससे पहले वर्ष 2022 में भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में ऐसी ही ऐतिहासिक बगावत हुई थी, जिसके कारण तत्कालीन महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार गिर गई थी और शिवसेना दो धड़ों में बंट गई थी।
उद्धव ठाकरे की बैठक से गायब रहे थे 5 सांसद; यहीं से गहराया शक
इस नए दलबदल की अटकलों को हवा तब मिली जब पिछले रविवार को मातोश्री पर उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पार्टी के कुल 9 सांसदों में से केवल 4 सांसद ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे।
सदन और बैठक में सांसदों की उपस्थिति की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:
| व्यक्तिगत रूप से उपस्थित सांसद | ऑनलाइन/वर्चुअल जुड़ने वाले सांसद |
| अरविंद सावंत | ओमप्रकाश राजे निम्बालकर |
| अनिल देसाई | भाऊसाहेब वाकचौरे |
| राजाभाऊ वाजे | नागेश बापूराव पाटिल अष्टीकर |
| संजय पाटिल | संजय देशमुख (और संजय जाधव ने फोन पर बात की) |
हालांकि, संजय राउत ने उस समय सफाई देते हुए कहा था कि बाकी बचे 5 सांसदों ने खराब स्वास्थ्य या अन्य व्यस्तताओं के कारण वर्चुअल माध्यम या फोन के जरिए उद्धव ठाकरे से बातचीत की थी और गलत राजनीतिक तस्वीर पेश की जा रही है।
डैमेज कंट्रोल के लिए अचानक दिल्ली पहुंचे संजय राउत; ओम बिरला से कर सकते हैं मुलाकात
मंगलवार को दिनभर चली इस हाई-प्रोफाइल सियासी रस्साकशी के बीच सत्तारूढ़ शिवसेना के नेता प्रताप सरनाईक ने एक बयान देकर इन अटकलों को और मजबूत कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि उद्धव गुट के सांसद हमारे साथ आना चाहते हैं, तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे उनका स्वागत करेंगे और उन्हें पूरी प्राथमिकता दी जाएगी।
इस संभावित बड़े राजनीतिक दलबदल और ‘ऑपरेशन लोटस/शिंदे’ को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार संजय राउत अचानक मुंबई से दिल्ली पहुंच गए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संजय राउत लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला से तत्काल मुलाकात का समय मांग रहे हैं, ताकि यदि उनके 6 या 7 सांसद अलग गुट बनाने या विलय की कोई विधिक अर्जी देते हैं, तो उस पर दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत तुरंत तकनीकी और कानूनी अड़ंगा लगाया जा सके।

