नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा विदेशी चंदे की विधिक निगरानी और जवाबदेही को और अधिक कड़ा किए जाने के बीच एक बड़ी प्रशासनिक व विधिक खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष देश के 72 स्वैच्छिक समूहों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम, 2010 (FCRA) के तहत नया विधिक पंजीकरण (Registration) प्रदान किया गया है।
इस वर्ष एफसीआरए लाइसेंस प्राप्त करने वाले प्रमुख संगठनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े ‘सेवा भारती’, ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ और ‘हरे कृष्ण आंदोलन’ जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
1. इन प्रमुख संगठनों को किन श्रेणियों में मिला विधिक लाइसेंस?
विदेशी दान प्राप्त करने के लिए प्रत्येक संगठन को विधिक रूप से विशिष्ट श्रेणियों के तहत पंजीकृत किया जाता है। आंकड़ों के अनुसार:
- सेवा भारती (काकीनाडा): यह संगठन मुख्य रूप से ब्लड बैंक का संचालन करता है और आपदा राहत व शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय है। इसे सरकार द्वारा आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उद्देश्यों की श्रेणी में विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विधिक रूप से पंजीकृत किया गया है।
- हरे कृष्ण आंदोलन भारत: ग्रामीण समुदायों के वंचित और पिछड़े बच्चों को सशक्त बनाने की विधा में कार्यरत इस संगठन को धार्मिक (हिंदू), सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक इन पांच विस्तृत विधिक श्रेणियों के तहत पंजीकरण दिया गया है।
भारत में विदेशी चंदे का वर्तमान विधिक ढांचा (आंकड़े)
- सक्रिय संगठन: वर्तमान समय में संपूर्ण भारत में लगभग 14,500 सक्रिय संगठन हैं, जो विधिक रूप से विदेशी दान प्राप्त करने के लिए पंजीकृत हैं।
- सालाना विधिक कार्यभार: गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग को हर वर्ष लगभग 15 हजार से 20 हजार नए आवेदन और लगभग 17 हजार वार्षिक विधिक विवरण (Annual Returns) प्राप्त होते हैं, जिनकी गहन विधिक संवीक्षा (Scrutiny) की जाती है।

