संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति का शिकार बनाने का आरोप; भाजपा बोली- राहुल गांधी ने पार कीं सारी हदें
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ के शीर्ष नेताओं की औपचारिक मुलाकात के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को भ्रामक, गैर-जिम्मेदाराना और अलोकतांत्रिक करार देते हुए उन पर करारा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी के बयानों को संवैधानिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन बताया।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं के अनुरोध का सम्मान करते हुए उन्हें राष्ट्रपति भवन में मुलाकात का समय दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी पिछले कई दिनों से निराधार, बेतुके और तथ्यहीन विरोध प्रदर्शनों में मशगूल हैं। त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि मुलाकात के उपरांत राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के संदर्भ में जो बातें मीडिया के सामने रखी हैं, वे न केवल अजीबोगरीब हैं बल्कि उनमें सच्चाई का लेशमात्र अंश भी नहीं है और यह पूरी तरह से एक सोची-समझी राजनीतिक चालबाजी प्रतीत होती है।
भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी के उस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार कर लिया है। त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद को इस प्रकार के राजनीतिक विवादों में घसीटना राहुल गांधी की दुर्भावनापूर्ण कार्यशैली को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उनके सहयोगी दल देश की हर निष्पक्ष और संवैधानिक संस्था को अपनी संकीर्ण राजनीति का अखाड़ा बनाना चाहते हैं।
सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे और राष्ट्र की एकता का प्रतीक होता है। उन्होंने कहा कि आज राहुल गांधी के बयान ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता से दूर रहने की हताशा में उन्होंने राजनीतिक मर्यादा की तमाम सीमाएं लांघ दी हैं। भाजपा ने मांग की है कि कांग्रेस नेतृत्व को संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले ऐसे बयानों पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

