इंफाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति बहाली और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। एनआईए ने मणिपुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के साथ मिलकर चलाए गए एक व्यापक संयुक्त अभियान (Joint Operation) में शुक्रवार को राज्य में हुई जातीय हिंसा के 6 अलग-अलग आपराधिक मामलों में संलिप्त 10 मुख्य आरोपियों को विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है।
7 जिलों में एक साथ पड़े छापे, दबोचे गए हिंसक तत्व
खुफिया इनपुट्स और तकनीकी विधिक साक्ष्यों के आधार पर केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों ने मणिपुर के घाटी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों के 7 संवेदनशील जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान (Search Operation) चलाया। इन गिरफ्तारियों को निम्नलिखित जिलों से अंजाम दिया गया:
- इंफाल ईस्ट (Imphal East) और इंफाल वेस्ट (Imphal West)
- बिष्णुपुर (Bishnupur) और चुराचांदपुर (Churachandpur)
- उखरुल (Ukhrul), चंदेल (Chandel) और फेरज़ॉल (Pherzawl)
सुरक्षा बलों पर हमले और बैंक डकैती जैसी संगीन वारदातों को दिया था अंजाम
एनआईए द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकियों (FIRs) और अब तक की विधिक जांच में यह साफ हुआ है कि गिरफ्तार किए गए इन दसों आरोपियों ने मणिपुर में भड़की जातीय अशांति के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने में बेहद सक्रिय और अग्रिम भूमिका निभाई थी। इन पर दर्ज मुख्य विधिक आरोप इस प्रकार हैं:
- सुरक्षा बलों पर कातिलाना हमले: गश्त कर रहे और कानून व्यवस्था संभाल रहे सैन्य व पुलिस जवानों पर सीधे जानलेवा हमले करना।
- अत्याधुनिक हथियारों की लूट: सरकारी शस्त्रागारों (Armouries) से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद की विधिक रूप से अवैध लूटपाट में शामिल होना।
- वित्तीय अराजकता: हिंसा की आड़ में बैंकों को निशाना बनाना और बैंक डकैती (Bank Robberies) जैसी गंभीर वित्तीय वारदातों को अंजाम देना।
खुफिया इनपुट और तकनीकी फॉरेंसिक जांच बनी आधार; सपोर्ट नेटवर्क होगा ध्वस्त
एनआईए के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सुनियोजित ऑपरेशन पूरी तरह से ग्राउंड-लेवल इंटेलिजेंस, तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) और जमीनी विधिक जांच के पुख्ता आधार पर संचालित किया गया था। इस कार्रवाई का मुख्य विधिक मकसद राज्य में अशांति फैलाने वाली आपराधिक और आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय अलग-अलग समुदायों के चरमपंथियों की पहचान करना और उन पर कड़ा कानूनी शिकंजा कसना है।
आगे की विधिक रणनीति: जांच एजेंसी को पूरा भरोसा है कि इन 10 आरोपियों की रिमांड और गहन पूछताछ से मणिपुर हिंसा की गहरी साजिशों, इसकी फंडिंग, अंतरराष्ट्रीय या अंतर-राज्यीय कड़ियों को जोड़ने वाले सपोर्ट नेटवर्क (Support Network) के बारे में कई चौंकाने वाले और अहम विधिक सुराग हाथ लगेंगे। एनआईए इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि क्या इन अलग-अलग हिंसक घटनाओं के पीछे कोई साझा केंद्रीय विद्रोही समूह या प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन काम कर रहा था।

